Tuesday, December 8, 2009


सहजयोग - आज का महायोग


सहज ध्यान से अपने अन्दर परम शांति और आनंद की खोज

परम पूज्य माताजी श्री निर्मला देवी की अनुकम्पा से सहज ध्यान से हमारी सुप्त शक्ति 'कुण्डलिनी' जागृत होकर परमात्मा की सर्वव्यापी शक्ति से योग करती है! इस योग से हमारी शारीरिक, मानसिक व अध्यात्मिक पीडाएं दूर हो जाती हैं और हम एक स्वस्थ और शांत जीवन की ओर अग्रसर होते हैं! परमात्मा के इस प्रेम को हम स्वयं अपने हाथों की हथेलियों व सर के तालू पर शीतल लहरियों के रूप में महसूस करते हैं! यह एक अद्दितीय जीवंत अनुभव है जिसे हम सहज ही प्राप्त करते हैं!

कुण्डलिनी शक्ति हमारी रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में त्रिकोणाकार अस्थि में साडे तीन कुण्डल में सोई हुयी स्थिति में विराजमान रहती है! कुण्डलिनी श्री माताजी तथा उनके चित्र के सामने दोनों हाथ फैलाकर हृदय से आत्मसाक्षात्कार पाने की प्रार्थना करने पर अनायास तत्क्षण जागृत हो जाती है क्योकि हमारी कुण्डलिनी और श्री माता जी का दैविक सम्बन्ध है! जब कुण्डलिनी जागृत होकर ऊपर उठती है तो हमारी रीढ़ की हड्डी के साथ - साथ स्नायु मण्डल पर सात चक्रों [मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर (नाभि), अनहत (हृदय), विशुद्धि, आज्ञा तथा सहस्त्रार] व तीन नाड़ियों (इडा, पिंगला और सुषुम्ना) को पोषित कर शक्ति प्रदान करती है, जिससे शारीरिक, मानसिक व आत्मिक संतुलन आ जाता है! इससे कैंसर, अस्थमा, मधुमय तथा अन्य शारीरिक व मानसिक असंतुलन व ड्रग्स की बीमारियाँ स्वतः ठीक हो जाती हैं! आज विश्व के 140 से ज्यादा देशो के लोग सहज ध्यान से लाभान्वित हो रहे हैं!

सहज ध्यान से अन्य लाभ:-

- व्यक्ति निर्विचार होकर आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करता है!
- वह पुर्णतः स्वस्थ, शांत व तनाव रहित हो जाता है!
- सहजयोग में नियमित ध्यान से अनेक बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं!
- यह एकाग्रता व स्मरण शक्ति में वृद्धि करके बच्चो की पढाई में सुधार लाता है!
- पारिवारिक जीवन व  सभी सम्बन्ध प्रेममय हो जाते हैं!
- धुम्रपान, मधपान, आँखों की अस्थिरता आदि दुर्गुण स्वतः दूर हो जाते हैं!
- ग्रहस्थ जीवन बिताते हुए गहन आध्यात्मिक अवस्था का आनंद प्राप्त होता है!
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आंतरिक चेतना द्वारा स्वयं का गुरु बनकर, अपना पथ प्रदर्शन कर सकते हैं!
 
आप सभी इस जीवन्त क्रिया का निशुल्क अनुभव करने के लिए निचे लिखे ध्यान केन्द्रों पर सादर आमंत्रित हैं!

प्रमुख ध्यान केंद्र:- 
प्रेरणा धाम, ए० पी० जे० स्कूल के सामने, सेक्टर- 15

प्रतेक शनिवार, शाम 6 बजे! (9818685218, 9891240001)

अन्य ध्यान केंद्र:- 
  • प्लाट न०  - 21, सेक्टर - 21C, प्रतेक रविवार, प्रातः 10:30 बजे! (9899926649, 9818685218)
  • ग्रांड कोलंबस स्कूल, सन फ्लग अस्पताल के समीप, सक्टर 16, प्रतेक प्रातः रविवार 10 बजे! (9818065798)
  • श्री राम मॉडल स्कूल, 60 फुट रोड, जवाहर कालोनी प्रतेक रविवार, प्रातः 10 बजे! (9811714602)
  •  जाट भवन, सेक्टर 3, बल्लभगढ़, प्रतेक रविवार प्रातः 9:30 बजे! (9971706544) 
  •  सुजान सिंह मेमोरिअल स्कूल, पॉवर हाउस कालोनी, अशोका एन्क्लेव (पल्ला), प्रतेक रविवार, प्रातः 10:30 बजे! (9810195845)



website:- www.sahajayoga.org

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Wednesday, December 2, 2009

PRAYER
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Mother, give us the self-awareness to know
honestly what we are.
What we can do and what we cannot.
Give us the wisdom to cheerfully admit our
mistakes and power to learn from them,
without repeating them.
Mother, give us the humility to learn from other's,
even if they are younger to us.
Mother, give us the courage to make decisions and
sensitivity to know the reaction of others.
Mother, give us the power to recognize
the worth of each individual.
Mother, give us the patience to live realistically and more useful life through service of our brother's and sister's and all other creatures of this universe
Mother, make us your instrument to spread

Vishwa Nirmala Dharma


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God's Gift




- I asked for strength and God gave me difficulties to make me strong
- I asked for wisdom and God gave me problems to solve
- I asked for prosperity and God gave me brawn and brain to work
- I asked for courage and God gave me dangers to overcome
- I asked for love and God gave me troubled people to help
- I asked for favours and God gave me opportunities

    I received nothing I wanted I received everything I needed
    My prayers has been answered



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    Cleansing Technique: Foot-Soaking


    When the day is over (also anytime), relax by soaking your feet in salt water while meditating. This technique relieves the body from stress and allows for a peaceful and relaxed night's rest.



    Sit comfortably in a chair with your hands out on your lap,
    facing Shri Mataji’s photograph. Light a candle in front of
    Shri Mataji's photograph.Place your feet in a basin or
    bucket of luke warm water containing a handful of salt.


    • Meditate for 10 to 15 minutes.
    • You can say some affirmations to cleanse the chakras.
    • Rinse and dry your feet.
    • Flush the water down the toilet. Try not to look directly in the bucket before flushing.
    • Don’t use the foot-soak bucket for any other purpose.
      Foot soaking is a Sahaja Yoga technique which many people will recognize from everyday life. Quit simply it is the Sahaja Yoga version of putting the feet in a bowl of warm water as a way of relaxing at the end of the day. It is best done in the evening, and the main difference in Sahaja terms is that salt is added to the water to represent the earth element. In this way we use all the elements - fire (with the candle), air, water and earth. The element of water rinses away, and salt (earth element) sucks or absorbs away negativity. Vibrations are the key to helping these processes work.



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